RAJESH _ REPORTER

अब कलम से न लिखा जाएगा इस दौर का हाल अब तो हाथों में कोई तेज कटारी रखिये

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सुरक्षा में सेंध ?

Posted On: 2 Dec, 2015  
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मतदाता मतदान केंद्र से दूर ?

Posted On: 1 Nov, 2015  
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पोर्न बंद ?

Posted On: 5 Aug, 2015  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

उस दृश्‍य की कल्‍पना की जा सकती है जहां एक  ओर शवों से भरी ट्रेन देश में आ रही थी और दूसरी ओर हमारे शासक स्‍वतंत्र होने की खुशि‍यां मना रहे थे । जनता पस्‍त थी और नेता मस्‍त थे क्‍योंकि‍ उनकी मनचाही मुराद पूरी हो चुकी थी । हर व्‍यक्ति‍ की जीवन में ऐसे पल आते हैं जब भारी हृदय से कुछ ऐसा नि‍र्णय लेना पड़ता है जो कठोर और अप्रि‍य तो होता है पर भवि‍ष्‍य को ध्‍यान में रखकर लेना और उसका कार्यान्‍वयन करना अति‍ आवश्‍यक होता है । आधुनि‍क भारत के तथाकथि‍त नि‍र्माता महान बनने की आकांक्षा में ऐसे अप्रि‍य नि‍र्णय नहीं ले पाये (वि‍लायत में पढ़े नेता धर्म के नाम पर दंगे फसाद और लाखों लोगों के कत्‍लेआम देखने के बावजूद इतने अदूरदर्शी हो सकते थे यह मानने का कोई कारण समझ में नहीं आता) जि‍सकी कीमत आज यह देश चुका रहा है । जो परि‍स्‍थि‍ति‍यां अभी वि‍द्यमान हैं और सरकारें जि‍स तरह से शुतुरमुर्गी व्‍यवहार कर रही हैं उससे तो यही लगता है कि‍ यदि‍ अब भी हम जागृत न हुए तो भवि‍ष्‍य में ऐसा भी समय आ   सकता है कि‍ बेबस होकर शांति‍ के लि‍ये हमारी प्‍यारी मातृभूमि‍ का एक और वि‍भाजन करना पड़े ।

के द्वारा:

मनरेगा और मिड डे मील ये दोनों ऐसी योजनायें हैं जिन्हें लेकर केंद्र और राज्य सरकारें ग्रामीणों की दशा बदलने और बच्चों के कुपोषण मुक्त होने के बड़े बड़े दावे करती हैं.. सच्चाई क्या है यह गाँव में बसने वाला हर नागरिक जानता है, रोज देखता है.. ...हाँ इन योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े हर आदमी (मसलन गाँवों के रोजगार सेवक, प्रधान, विकास अधिकारी, MDM प्रभारी अध्यापक, ADO, BDO आदि आदि..) का कुपोषण जरूर दूर हो रहा है और दशा का तो कायापलट है... बड़े अधिकारियों या जन प्रतिनिधियों के पास इन योजनाओं की असली दशा जानने, देखने या समझने की न तो कोई वज़ह है न ही फुर्सत.. और जाँज हुई भी तो कोई अपने 'मौसेरे भाई' लोगों पर कार्यवाही भला क्यों करेगा..?? अब अगर ऐसी व्यवस्था में आज बिहार में MDM खाकर बच्चों की हुई मौत जैसी दुखद घटनायें घटती भी हैं तो इनकी बला से, कहाँ इनके बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ना है जे यह खाने की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये कोई प्रभावी कदम उठायेंगे, देखियेगा इस मामले में भी बावर्ची जैसे छोटे-मोटे कर्मचारियों की गलती निकाल कर, उन्हें बलि का बकरा बनाकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर लेंगे ये लोग..

के द्वारा: ajaykr ajaykr

के द्वारा:

आज मै एक ऐसी रचना लेकर आप सब के सामने उपस्थित हुआ हूँ, जिसे पढ़कर आप सब की आँखे नाम हो जायेगी. और यही हमारे देश की कड़वी सच्चाई भी है, इस कविता के माध्यम से मै ऋषभ शुक्ला, इस समाज का निर्दयी ही सही लेकिन है तो सच. आज हमारे समाज के लोग महिलाओ के प्रती वही पुरानी सोच रखते है जो वह हमेशा रखते आये है, और आगे भी ऐसी ही सोच रखने का इरादा है. गरीब माँ-बाप अपनी बेटियों को बोझ समझते है और वह संतान के रूप में एक बेटा चाहते है, और इसके लिए वह गर्भ में ही जाच के द्वारा उन्हें यदी पता चल गया की गर्भ में बच्ची है तो उसे इस दुनिया में आने से पहले ही मार देते है, उस नन्ही सी जान को जो इस निर्मम दुनिया में आने को बेताब रहती है, उसकी सभी इच्छाओ को भी मार देते है . मै इस कविता के माध्यम से उस छोटी गुडिया के दर्द को आप सब से मुखातिब करने का प्रयत्न कर रहा हूँ. कृपया मेरी गुजारिश है की आप सब इस लिंक को देखे और उसके बारे में कम से कम दो शब्द कहे. यदी कमेंट देने में कोई असुविधा हो तो उसे लाइक करे या वोट करे. http://rushabhshukla.jagranjunction.com/?p=25 शुक्रिया

के द्वारा: ऋषभ शुक्ला ऋषभ शुक्ला

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: annurag sharma(Administrator) annurag sharma(Administrator)

मान्यवर ,पहले तो खुद को जगाना चाहिये आपको ....खुद सोते हुए भारत को जगाने उठ खड़े हुए हैं ....कुछ डॉ भ्रष्ट हैं .....क्या कुछ नेता [ज्यादातर] ....कुछ सरकारी मुजजिम [ज्यादातर ]......कुछ आम जनता [घूस देती हैं .....काम निकलने के कुछ भी करने को तैयार रहती हैं } सच्ची समाज सेवा तब हों सकती हैं जब हम खुद को सुधारे [जगाएं],हेलमेट पहन के नही जायेंगे .नुक्कड़ पर पुलिस को ५० रु देके निकल लेंगे .....लाईन लगाने के बजाय १०० रूपये ज्यादा देकर हर काम तुरन्त आम जनता ही कराती हैं | मेडिकल की पढ़ाई हर एईरा-गैरा ,नत्थू -खैरा नही कर सकता .जितने देश भर में इंजिनीयरिंग के कालेज हैं ,मेडिकल में उसकी चौथाई सीटे हैं .......हर डॉ चोर नही हैं ....विश्व के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति ..................... बराक ओबामा के मेडिकल स्टाफ में १८ में से १२ डॉ .हिन्दुस्तानी हैं ,किन्तु भांड आमिर को भारतीय डॉ पसंद नही हैं .....हमारी हिन्दुस्तानी प्रतिभा की कद्र नही करती यहाँ की जनता इसीलिए मजबूरन लोगों को देश से बाहर जाना पड रहा हैं ,फिर भी अब तो नया कानून भी बन गया की वापस देश लौटना भी हैं |गाँव में हमे प्रैक्टिस करने में परहेज नही था ...हाँ बुनियादी मेडिकल यंत्र और दवाओ के बिना डॉ क्या कर सकतें हैं | मेरे ब्लॉग पर आईये .......

के द्वारा: ajaykr ajaykr

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के एक टीवी चैनल ने एक हिंदू बच्चे द्वारा जबरन इस्लाम धर्म अपनाने का लाइव प्रसारण किया गया। जिसके बाद एक प्रमुख समाचार पत्र ने लिखा है कि इससे साफ संकेत मिलता है कि पाक में इस्लाम धर्म की तुलना में अन्य धर्मो को बराबरी का दर्जा नहीं मिलता है। डान ने अपने संपादकीय में लिखा है कि देश की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया किसी भी चीज को चटपटा बनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। लेकिन यह तो हद हो गई कि अब वह धर्म के नाम पर खिलवाड़ करने लगी है। किसी की भावनाओं का मजाक बनाने लगी है। इस घटना के प्रसारण से यह साफ हो गया है कि अब मीडिया ने अपने व्यावसायिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए नैतिक मूल्यों, वैचारिक खुलापन और सामान्य ज्ञान को परे रख दिया है। गौरतलब है कि मंगलवार को टीवी के इस शो के दौरान उन्हीं के स्टूडियो में एक इमाम को एक हिंदू लड़के को इस्लाम धर्म स्वीकार करते हुए लाइव दिखाया गया था। इसके अलावा शो के दौरान ही स्टूडियो में बैठे हुए दर्शकों से इस लड़के के लिए नए नाम सुझाने के लिए भी कहा गया। अखबार ने यह भी लिखा है कि ऐसा कोई कारण नहीं, जिससे यह समझा जा सके कि उस लड़के ने स्वेच्छा से इस्लाम कबूल नहीं किया है, परंतु यह शो टीवी के दर्शकों को कुछ नया और अलग दिखाने की ललक में तैयार किया गया है। संपादकीय के मुताबिक चैनल ने संभवत एक बार भी यह नहीं सोचा कि इससे देश में बसे अल्पसंख्यक हिंदुओं को क्या संदेश जाएगा। जिस उत्साह और प्रसन्नता के साथ इस धर्मातरण को दर्शकों ने सराहा, उससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि जिस देश में अल्पसंख्यकों से कई मामलों में पहले ही दोयम दर्जे के नागरिकों जैसा बर्ताव किया जाता है वहां कुछ भी हो सकता है। अखबार के मुताबिक पाकिस्तानी मीडिया की समस्या यह है कि उनके पास जिम्मेदारी का कोई एहसास नहीं है और वे किसी भी चीज को सनसनीखेज बनाने के लिए नैतिक मूल्यों और उसके औचित्य के बारे में सोचना ही बंद कर चुकी हैं। मीडिया यह भी नहीं सोचती है कि इनकी किस खबर से देशवासियों को क्या संदेश पहुंचेगा। क्या कहोगे इस बारे मे हिन्दुओ को ही क्यों सहिष्णु होना चाहिए सुधर जाओ नहीं तो आज असम कश्मीर तो आपके शहर की बारी आएगी जागो

के द्वारा:

प्रिय मित्रो आज हम सब इन गुलाम मानसिकता वाले कांग्रेस्सियो (नेहरु और गाँधी) की वजह से अपने ही देश मे डर कर जी रहे है एसा लगता है हम पाकिस्तान मे रह रहे है कल टी वी पर तथाकथित धर्म्निर्पेच मुसलमानों को मोदी जी के interview पर टिप्परी कर रहे थे कोई भी मुस्लमान मोदीजी के प्रशासन की तारीफ नहीं कर रहा था सब गोथरा को रो रहे थे पर हममे से हमारे हिन्दू भाई उन धर्म्निर्पेच मे शामिल हो जाते है भारत के बहार भी अगर कोई मुस्लमान के खिलाफ कुछ भी हो जाता है तो भारत के ही नहीं पूरी दुनिया के मुस्लमान एक हो जाते है और हम ? पाकिस्तान मे चाहे हिन्दुओ पर कितने अत्याचार होते है कोई मुस्लमान उन हिन्दुओ के बारे मे एक शब्द बोलता है और बड़े दुःख के साथ हम भी नहीं अगर हम आज नहीं सुधरे तो हमारी आने वाली संतान कभी माफ नहीं करेगी

के द्वारा:

आज भारत की ऐसी स्थिति का कारण 1947 में अंग्रेजों के साथ गाँधी जी और कांग्रेस का किया गया समझोता है.......अँगरेज़ जो चाहते थे आज तक वैसा ही हुआ है कानून आज भी वही हैं जो उन्होंने बनाये थे........यदि हम समझोते से आजाद न होकर क्रांतिकारियों की क्रांति से आजाद हुए होते........तो भारत एक अखंड राष्ट्र बनता.........आजादी से लेकर आज तक ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न ही नहीं होती..........किन्तु कांग्रेस ने देश के साथ सदैव देशद्रोह किया है और आज भी कर रही है और हम कुछ कर नहीं पा रहे हैं.........सम्पूर्ण स्वतंत्रता एक अखंड भारत के निर्माण की आवश्यकता है........ भारत स्वाभिमान आन्दोलन का समर्थन कीजिये..........परिवर्तन अवश्य होगा........9 अगस्त दिल्ली चलें सरकार और व्यवस्था को अंतिम चेतावनी........... जय हिंद जय भारत........!

के द्वारा: pritish1 pritish1

सोचने वाली बात है.. या यूं कहें साधारण समझ की बात है... इस्लाम के बारे में बोला जाता है शांति का धर्मं है.. कुरान सबसे प्यार करना सिखलाता है..सारे मुसलमान एक जैसे नहीं होते ... वगैरह वगैरह... मगर कही गयी या उछली बातों पर जाने के बजाय अगर तथ्यों पर जाएँ या घटित घटनाओं पर जाएँ तो क्या फिर भी यही बोला जायेगा.... ये तथ्य केवल भारत के नहीं बल्कि पूरी दुनिया के देखे जाने चाहिए.... आप हर शहर में मुसलमान बहुल एरिया के बारे में जानकारी लीजिये और ज्यादा नहीं कर सकते तो अपने शहर के मुस्लिम इलाके का जायजा लीजये .... वैसे तो मैंने बहुत से शहर घूमें हैं हर शहर में कमोबेश स्थिति एक जैसी है... मीडिया गुजरात को लेकर मोदी के पीछे पड़ा रहता है... तो कोकराझार के बारे में क्या बोलेंगे या फिर कुछ दिन पहले राजस्थान के भरतपुर, या फिर कुछ दिन पहले मथुरा के बारे में .... या फिर ढाका में हुए भारत पाक के मैच के बाद बंगाल के हावड़ा में हुई घटना( मीडिया ने इस खबर को नहीं उछाला) ..... या फिर इस्राएल में यहूदी के साथ भिडंत हो या ९/११ घटना ..या फिर सोमालिया की घटना या फिर अन्य अफ़्रीकी देशों की दशा ... खुद जलते हुए मुस्लिम बहुल राष्ट्र.. मध्य पूर्व के देश हो या पाकिस्तान या बंगला देश हो कोई भी देश ...... सोचने वाली बात है... ये तथ्य के वाल आज के हिसाब से नहीं बल्कि इतिहास में भी देखे जाए जाने चाहिए .... कोकराझार में हुई घटना तो बस इन्ही सिलसिलों में से एक है.... बस तिलमिला के रहिये और कांग्रेस को गाली दीजिये.. बस यही है इस देश की विडम्बना .. या फिर ..AC कमरें के अन्दर बैठकर रोक स्टार के गाने सुनिए ... कहिये ...F**K THIS POLITICS... जब कभी राह में कोई दुर्घटना होती है तो हर किसी को लगता की ये उसके साथ नहीं हो सकती ..दूसरों के साथ ही होती ..मैं तो अपना सब कुछ ठीक रखता हूँ.. मगर वो """" दूसरा """ कौन है.??????

के द्वारा: yogeshkumar yogeshkumar

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: shaktisingh shaktisingh

श्रीमान जी, सादर नमस्कार. पांचों उँगलियाँ कभी बराबर नहीं होती, आज भी मानव सेवा को सर्वोपरि मानने वाले चिकित्सकों की कमी नहीं. लेकिन यह भी सच है के आज बहुसंख्या ऐसे चिकित्सकों की है जो सेवा नहीं धंदा करने के लिए बैठे हैं. माँ-बाप अपने बच्चों को इसलिए डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित करते हैं ताकि वह मोटी कमाई कर सके. आयुर्वेद के महान चिकित्सक चरक का कहना है के यदि कोई चिकित्सक अपनी सेवा के लिए धन की कामना करता है तो वह पाप का भागी बनता है, आज की परिस्थितियों को देखते हुए कोई यह नहीं कहता के चिकित्सक फीस ना लें. लेकिन जायज हो तो किसी को कोई ऐतराज नहीं. कुलमिलाकर आजके चिकित्सकों और चिकित्सा व्यवस्था का सटीक अंकन किया है. इसके लिए बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनएं. नमस्ते जी.

के द्वारा: Ravinder kumar Ravinder kumar

के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat

चन्दन जी आखिर इस देश में धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा क्या है अनजाने मे ही सही नितीश ने एक व्यापक बहस छेड़ दी है "धर्मनिरपेक्षता"।क्या है ये क्या कोइ भी वस्तु अपने धर्म के विना चल सकता है फ़ुल का धर्म है खुशबु देना उसी तरह भारत मे हिंदुत्व एक ऐसा धर्म है जो भारत की जिवन पध्दती है।इसके बगैर भारत की कल्पना भी नही की जासकती है।हमने पिपल के पेड़ की पुजा की क्योकि सबसे ज्यादा आक्सीजन पिपल देता है ये तो स्वर्थ की बात हो गई अरे हमने तो साँप को भी दुध पिलने का काम किया क्योकि हम जियो और जिने दो की विचारधारा के लोग है। ये देश का दूर्भाग्य है कि हमे राम की जन्मस्थली के लिये लड़ाई लड़्नी पड़्ती है।जिसे आज न्यायपलिका भी मानती है हैरानी कि बात ये है कि अपना हक मांगने पर हम सांप्रदयीक हो जाते है।राष्ट्र्संघ के हिसाब से 10% आबादी वाला समुदाय अल्पसंखक होता है ऐसा समुदाय भारत मे सिख,जैन,बौध्द और पारसी है परंतु 1984 के दंगो मे भारत की सड़्को पर दौड़ा दौड़ा कर सिखो को मारने वाली सरकार के मंत्री और देश का मटीयामेट करने वाले वर्त्तमान सरकार के मंत्री प्रनव राय को देश के सबसे बड़े सम्वैधानीक पद के चुनाव मे समर्थन करना धर्मनिरपेक्षता है। इस देश के नेताओ ने तुष्टीकरण को धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्र्भक्ती को संप्रदायीक बना दिया है।वोट बैक की राजनिती के लिये इस देश के नेता तथाकथित अल्पसंख्यक समाज का तुष्टिकरण करने लगे है और इस देश की आत्मा हिंदु समाज की उपेक्षा तभी तो श्रीमती सोनिया गाँधी communal and targeted violation bill लाती है।कृपया इन बिन्दुओ पर अपने विचार जरुर दे .प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार

के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat

सन 2014 मे लोक सभा चुनाव होना है। जन सामान्‍य मे धारणा बनती जा रही है कि 2014 के वुनाव मे कांग्रेस को चुनाव हारना है। अब प्रश्‍न उठता है कि कांग्रेस के बाद कौन। देश की राजनीति दो धडों मे बटी है तथाकथित सेकुलर तथा कथित सांम्‍प्रदायिक। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी जिसे भारतीय राजनीति मे सांम्‍प्रदायिक राजनैतिक पार्टी के रूप मे प्रचारित किया जाता है तो दूसरी तरफ कांग्रेस समाजवादी पार्टी जनता दल यूनाईटैड जैसी तथाकथित सेकुलर पार्टियां। काग्रेस जिसे अब चुकी हुई पार्टी माना जा रहा है जो लम्‍बे समय से सेकुलर होने का दम्‍भ भर रही थी के पराभव के बाद उसका स्‍थान कौन ले इस बात को लेकर भाजपा विरोधियों मे होड मची है। कांग्रेस द्वारा खाली किये गये प्रधानमंत्री के पद पर कौन तथाकथित सेकुलर बैठे इस बात को लेकर जंग छिड गई है। इस जंग मे नये नये सामिल हुए नितीश जी भी प्रधानमंत्री बनने के हसीन सपने पाले हुए है। अब वे कांग्रेस द्वारा खाली किये गये सेकुलरवाद के झन्‍डाबरदार बनना चाह रहे है। समय समय पर नितीश कुमार जी के प्रधान मंत्री बनने की इच्‍छा भी खबरों मे आती रही है। बुरा प्रधानमंत्री बनना या उसके सपने देखने मे नही है बुराई हिप्‍पोक्रेसी मे है। हमारे यहां कहा जाता है गुड खायें और गुलगुले से परहेज करे। जब विहार मे सरकार बनाना था तब भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाने मे कोई परहेज नही था आज जब पार्टी नरेन्‍द्र मोदी जी को प्रधानमंत्री पद का उम्‍मीदवार घेाषित कर रही है तो नितीश कुमार जी को भारतीय जनता पार्टी मे बुराई नजर आने लगी। राष्‍टीय और अर्न्‍तराष्‍टीय मीडिया के सर्वेक्षण के अनुसार नरेन्‍द्र मोदी जी प्रधानमंत्री पद के सवसे उपयुक्‍त उम्‍मीदवार है। आज प्रधानमंत्री पद की दौड मे वे भारतीय जनता पार्टी के सबसे मान्‍य उम्‍मीदवार है ऐसे मे नितीश जी कैसे अपेक्षा करते है कि पार्टी उनके स्‍थान पर किसी अन्‍य को उम्‍मीदवार घोषित कर देगी। नितीश जी से अनुरोध है कि वे क़पया बताये कि विहार के विधान सभा चुनाव मे अपने स्‍थान पर किसी अन्‍य को विहार का मुख्‍यमंत्री के रूप मे पेश कर चुनाव क्‍यों नही लडे। नितीश जी इतने ही सेकूलर थे तो उस समय जब गोधरा की घटना हुई थी और वे भारत सरकार मे भारतीय जनता पार्टी के साथ सरकार मे मंत्री थें उस समय उन्‍होने इस्‍तीफा क्‍यों नही दे दिया था। ऐसा उन्‍होने उस समय इसलिये नही किया था क्‍योंकि उस समय नितीश जी को अपना वजूद बचानें के लिये भारतीय जनता पार्टी की आवश्‍यकता थी। आज वे बडे नेता हो गये है वही भारतीय जनता पार्टी और नरेन्‍द्र मोदी खलनायक नजर आ रहे हैं । एक राजनैतिक नेता के रूप मे नितीश कुमार जी का व्‍यवहार ऐसा है जैसे कोई आम आदमी व्‍यवहार कर रहा हो। नितीश कुमार जी से ऐसे व्‍यवहार की अपेक्षा नही की जाती थी। नरेन्‍द्र मोदी जी गुजरात के मुख्‍य मंत्री है। वहां की जनता ने उन्‍हे चुनकर मुख्‍यमंत्री बनाया है वैसे ही जैसे विहार की जनता नितीश कुमार जी को विहार का मुख्‍यमंत्री बनाया है। अब अगर नरेन्‍द्र मोदी जी नितीश कुमार पर आरोप लगाने लगे तो उन्‍हे कैसा लगेगा। गुजरात की जनता गोधरा की घटना भूल गई है लेकिन तथा कथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां उसे भूलने नही देती। गोधरा गोधरा करते करते कांग्रेस का गुजरात मे सत्‍यानाश हो गया अब नितीश कुमार की बारी है। सन 2014 के चुनाव मे भारतीय जनता पार्टी सत्‍ता मे आयेगी नितीश कुमार जी साथ रहे या न रहे। मै तो मानती हूं कि नितीश कुमार जी भारतीय जनता पार्टी के लिये लम्‍बी दूरी के सहयोगी के रूप मे विश्‍वसनीय नही रहे। भारतीय जनता पार्टी को नितीश जी के विरोध की परवाह किये विना मोदी जी को प्रधानमंत्री पद का उम्‍मीदवार घोषित कर देना चाहियें। जिसे साथ रहना है रहे जिसे जाना है जाय। अगर हम मजबूत होगें तो कई साथी मिल जायेगें और अगर हम कमजोर हुये तो सभी साथ छोड कर चले जायेगे। जरूरत है स्‍वयं को मजबूत करने की। जय हिन्‍द जय भारत।

के द्वारा:

चन्दन तुम चन्दन नहीं हो सकते विश (जहर) हो सकते हो इस हिंदुस्तान के लिए क्या कभी तुमने कश्मीर मे मारे गए या विस्थापित हिन्दुओ के बारे मे लिखा है ? क्या जहाँ मुस्लमान अधिक संख्या मे है वहां हिन्दुओ की दशा के बारे मे लिखा है? क्या तुमने भारत माता को डायन कहने वाले मुस्लमान के बारे मे लिखा है ? तुम जैसे धर्मनिरपेक्ष हिन्दू (मुर्ख जिस डाल पर बैठा है उसे ही काट रहा है) ने देश का satyanash kiya है musalmano ने utana nahin ? क्या paakistan मे rah रहे हिन्दुओ के बारे मे सोचा है क्या मे आपसे जबाब की उम्मीद रखु? अगर मोदी जी ने टोपी नहीं पहनी तो वो सम्प्रिद्यिक हो गए टोपी तो मुस्लमान कांग्रेस को और कांग्रेस मुसलमान को पहना रही है

के द्वारा:

मित्रवर नरेंदर मोदी धर्मनिरपेक्ष छवि बनाने में असफल हुए है ,दुसरे शब्दों में कह सकते उनके प्रयास इस मिथ को और तोड़ते से प्रतीत होते है , मै इसके लिए वंहा के दंगो , SIT की रिपोर्ट ,राहुल भट्ट के वक्तव्य ,और जाकिया जाफरी के हलफनामे को इसका आधार नहीं बनाना चाहता , ———- इसके लिए में समय समय पर सार्वजानिक मंचो पर उनके मुस्लिम विरोधी तहरीरे की तरफ ध्यान ले जाना चाहूंगा , उस दृश्य की तरफ आपका ध्यान खीचना चाहूँगा ,जब सद्भावना दिवस पर इक मुस्लिम इमाम की सद्भावना टोपी को उन्होंने अपने सर पर पहनने से इनकार कर दिया था , ——– देश को ऐसे नेता की जरुरत है ,जो सारे वर्णों ,धर्मो ,जातिओं को इकरूप में देखे

के द्वारा: चन्दन राय चन्दन राय

आदरणीय जागोजागोभारत जी, अब आपको जगाओ   जगाओ  भारत  बनना पड़ेगा। अब तो पूरी राजनैतिक जमात भ्रष्टहो चुकी है। सारी पार्टियाँ जनता की नजर में अलग अलग हैं किन्तु भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सब एक हैं। गैर राजनैतिज्ञ को राष्ट्रपति न बनने देना इसका उदारहण है, सब पर्दे के पीछे खेल रहे हैं। भाजपा भी इस गैम में शामिल हो गई है। कमाल को कोई नहीं बनाना चाहता है राष्ट्रपति। एक ममता को छोड़कर। यह भी सच है कि ममता को छोड़कर सभी भ्रष्ट हैं। कोई दिखता है कोई दिखता नहीं है। सब पहिले से फिक्स था। डिम्पी यादवको निर्विरोध चुना जाना, राष्ट्रपति चुनाव की ही सौदेवाजी थी। इन नेताओं को डर था कि यदि कलाम जैसा कोई राष्ट्रपति बन जाता, तो कहीं भ्रष्टाचार विरोधी लोगों के हौसले न बढ़ जायं। और राष्ट्रपति से जनलोकपाल को बनाने का निर्देश न आ जाये। अब व्यवस्था परिवर्तन के लिये विशाल आन्दोलन तथा क्राँति की शुरुआत होनी चाहिये। राष्ट्रपति का चुनाव जनता द्वारा हो। राष्ट्रपति गैरराजनैतिक व्यक्ति हो। यह विधायक या सांसद अपने इलाके के वोटरों की 10 प्रतिशत जनता की बनी हुई समिति के अनुसार ही अपने मत का प्रयोग करे। मंत्रियों के स्वविवेक का अधिकार समाप्त हो। हर राजनैता के निर्णय पारदर्शी हों। नेता द्वारा जनता से किये गये वादों से फिरना देशद्रोह के समकक्ष माना जाय। चुनाव पूर्व किये गये वादे या घोषणा पत्र के विरुद्ध काम करने पर उस पार्टी की मान्यता रद्द कर दी जाय। स्विटजरलैण्ड की कानून बनाने की प्रक्रिया को अपनाया जाय। जाति या धर्म की बात करने वाले नेता को आजीवन प्रतिबंधित कर दिया जाय। अब तो बाबा जी और अन्ना जी जैसे लोगों को कलाम और पूर्व सेना अध्यक्ष आदि जितने भी ईमानदार लोग हैं को मिलाकर एक राजनैतिक दल बनाकर चुनाव लड़ना चाहिये। और विशाल बहुमत से जीतकर इस संसदीय व्यवस्था को बदल कर अध्याक्षात्मक प्रणाली को अपनाना चाहिये। जिससे प्रत्यक्ष प्रजातंत्र का निर्माण हो सके।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

आदरणीय विक्रम जी अनिल जी आपने अच्छा प्रश्न उठाया की जब किसी अबला का बलात्कार होता है तो आप को गुस्सा क्यों नहीं आता तो में बता दू की यदि किसी अबला का बलात्कार होता है तो उसके बचाव के लिए कानून है साथ ही आम नागरिक भी तटस्थ नागरिक की भूमिका निभाते है और खुले आम उसका विरोध किया जाता है लेकिन आज जिस प्रकार गो माता काटी जा रही है उससे पूरी नश्ल पर ही खतरा मडराने लगा है जिससे को सिर्फ आम इन्सान ही प्रभावित नहीं होगा बल्कि पूरी प्रकृति पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा साथ ही मेरे द्वारा उठाये गए अन्य सवाल पर में इतना ही कहना चाहता हु की कभी ७५ फीसदी अल्प संख्यक बहुल किसी जिले का प्रवाश करे .जबाब मिल जायेगा यही नहीं कुछ हिन्दू दर्शन पर लिखी गई पुस्तकों का भी अध्यन करे .गलती माफ़ करेंगे प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat

विक्रम जी, बहुत सही सवाल उठाया है, आपने और करारा जवाब दिया हैं आपने, भाई मजा आ गया. परन्तु दोष इसमें धर्म का नहीं है बल्कि उस मानसिक विचारधारा का हैं जिसका उपयोग लोग अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए करते हैं. इसके साथ ही जाने अनजाने में दुसरे धर्मो का अपमान और अपने धर्म का सम्मान करते हैं और साथ ही अपनी नीचता दिखाकर अपने धर्म को भी नीच साबित कर देते हैं. आज किसी भी धर्म को दुसरे धर्म से कोई खतरा नहीं हैं बल्कि उसको खतरा उन्ही के लोगों से हैं. क्योंकि सभी धर्म प्रेम, भाईचारा और शान्ति का सन्देश ही देते हैं. जो लोग गौ को माता कहकर पुकारते हैं तो उनसे पूछना चाहता हूँ कि जब दुसरे जीवों को मारकर खाते हो तब नहीं दिखता कि वह भी किसी के माँ और बेटे ही होंगे......धर्म के मामले में, मैं दिनेश भाई के विचारों को काफी हद तक समर्थन करता हूँ......पर आप दोनों के विचार कहीं न कही स्वार्थो से परिपूर्ण हैं.... आप दोनों को कीचड़ उछालना है तो किसी धर्म पर मत उछालिये. खुद के ऊपर उछालिये और घृणा अपने अन्दर पल रहे नफ़रत और बुराई से करिए.......और जो निचे लिंक दे रहा हूँ उस पर विचार करिए... http://merisada.jagranjunction.com/2012/02/09/%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A4/

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

गौ माता के काटने पर गुस्सा होना अच्छी बात है लेकिन दोस्त जब किसी अबला की इज्जत तुम्हारे ही भाई लूटते हैं तब गुस्सा क्यों नहीं आता.जब एक भाई दूसरे भाई को नीची जाति के नाते अपमानित करता है तब गुस्सा क्यों नहीं आता.क्या बिना जाति के आपका कोई अस्तित्व है.दूसरे पर गुस्सा करनें से पहले अपने आप पर गुस्सा करो. पूजहि विप्र सकल गुर हीना, शूद्र न पूजहि गुर ज्ञान प्रवीना. ढोल गवार शूद्र पशु नारी, सकल तारना के अधिकारी. जो औरत एक से अधिक मर्दों से रति करे वो कन्या कहलाती है. जो मर्द अपनी ही बेटी से सम्भोग करे वो सृस्तिकर्ता है. पीत्वा पीत्वा पुनः पीत्वा, यावति पतति भूतले. पुन्रोत्थाय पुनः पीत्वा, पुनर्जन्म न विद्यते. क्या यही आपकी संस्कृति है

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भाजपा खुदरा व्यापार को विदेशी पूंजी के लिए खोलने के कांग्रेसी फैसले पर आगबबूला दिख रही है..उमा भारती वाल मार्ट में आग लगाने की बात कर रही हैं...अरे भाई, किसको बेवकूफ बना रहे हो?..आडवाणी जी, बहुत पहले कह चुके हैं कि आर्थिक उदारीकरण तो वास्तव में भाजपा (जनसंघ) की अर्थनीति है जिसे १९९१ में नरसिम्हा राव/मनमोहन सिंह ने चुरा लिया..एन.डी.ए सरकार के कार्यकाल में स्वदेशी का क्या हाल था, उमा भारती जी को पता नहीं हो तो गोविन्दाचार्य से पूछ लें..अगर २००४ में एन.डी.ए को लोग धकिया कर सत्ता से बाहर नहीं करते तो उसी साल खुदरा व्यापार में १०० फीसदी विदेशी पूंजी की इजाजत दे देती वाजपेयी/आडवाणी की सरकार...जसवंत सिंह, आप कहाँ हैं? और हाँ, जागो ग्राहक जागो...भगवा रंग की असलियत पहचानो...

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ये जो बाहर "गुप्त" सर्जरी के नाम पर मैडम गई थी, उसका फ़ल है. अभी ईलाज के बहाने सोनिया गाँधी अपने पुरे परिवार और अपनी बहनों के पुरे परिवार के साथ अमेरिका मे थी ..उन्होंने अस्पताल के पुरे तीन मंजिल और दो पार्किंग बुक करवा लिए थे ..यहाँ तक उस अस्पताल मे जितने भी भारतीय मूल और पाकिस्तानी मूल के कर्मचारी थे उनको भी वहा से हटा दिया गया था ...सोनिया गाँधी से कौन कौन लोग मिलने आते थे ये एकदम गुप्त रखा गया .. चलो ये इनका निजी मामला है ..एक महारानी कुछ भी कर सकती है .. लेकिन अचानक केबिनेट ने रिटेल सेक्टर मे 100% FDI की मंजूरी दे दी, और सबसे मजेदार बात ये कि इस मंजूरी से पहले ही वालमार्ट भारत में नियुक्तियां कर रहा है !!!

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चर्चित जी इस बिल का नाम है साम्प्रदायिक और लक्षित हिंसा बिल-२०११ इस बिल के अनुसार पीड़ित की व्याख्या मुश्लिम से की गई है कही भी कोई हिंसा फैलती है तो उसके लिए जिम्मेवार बहुसंख्यक आबादी मतलब हिन्दुओ को दोषी माना जायेगा .अल्पसंख्यक की छोटी सी सिकायत पर बिना जाच के ही करवाई होगी .बहुसंख्यक सांप्रदायिक हिंसा विधेयक एक खतरनाक बिल है क्योंकि यह संविधान के संघीय ढांचे को क्षति पंहुचाने वाला है। यह केंद्र को सारी शक्तियां सौंपता है। इसके अलावा यह विधेयक किसी को नागरिक के रूप में स्वीकार नहीं करता है, बल्कि हर व्यक्ति को बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य के रूप में देखता है।

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सोनिया गाँधी ने सांप्रदायिक हिंसा बिल लाकर, जायज मांगों को लेकर रामलीला मैदान में शांतिपूर्ण तरीके से अनसन पर बैठे लोगो का दमन करवा कर जिसमे महिलाये और बच्चे भी थे, स्पष्ट कर दिया है कि वो भारत विरोधी तो हैं ही साथ ही उनको भारत के महिलाओ और बच्चो से कोई प्यार नहीं है. भारत की जनता से उनको कोई प्यार नहीं. नियमानुसार वो प्रधानमंत्री बन ही नहीं सकती थी. इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री पद का जानबूझकर त्याग का नाटक किया. भारत की जनता कि भावनाओं से खिलवाड़ किया. अंततः वो सुपरपावर बन कर प्रधान मंत्री पद के ऊपर बैठ गयी और एक संविधानेत्तर संस्था राष्ट्रिय सलाहकार परिषद् का गठन किया. और मनमोहन सिंह को कठपुतली बनाया. कृष्ण भारद्वाज

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आप शायद मानते है की शिक्षण देनेका अधिकार सिर्फ सरकार का ही होना चाहिये । आज हर चीज बीकती है । कोइ शिक्षण बेचना चाहे तो क्या आपत्ती है । कोइ शिक्षण कभी फोकट नही था । सरकारने भी अरबो रुपये खर्च किये है । आदमी ही कामचोर हो गया । सरकार अपने शिक्षको को डन्डा मार के काम नही करवा सकती । ईस मामले मे सरकार को कोइ कोस नही सकता । कोसना हो तो आदमी ही कामचोरी को कोसो । बीन सरकारी शिक्षण सन्था अपने शिक्षको को अच्छी तरह कन्ट्रोल कर सकती है । तभी तो पढाई का स्तर सरकारी शिक्षण से बेहतर है । आप के केहने से बीन सरकारी शिक्षण सन्था का शिक्षण स्तर हलका नही हो जायेगा । करोडो माबाप की राय हमारी या आपकी राय से ज्यादा महत्व रखती है । भारत की बुनियाद क्या है ? रामम रामौ रामाहा ? सन्स्क्रुत पढाना चाहिए ? जो आज किसी कामका नही । बापुके चरखे चलाना सिखाना चाहिए जो आज किसी काम का नही । भारत को दुनिया से अलग क्यो रहना चाहिए ? जब दुनिया छोटी हो रही , ग्लोबलाईझेशन के कारन लोग नजदिक आ रहे है तो ईसमे क्या बुराई दिखती है । दुनिया से कट जाना और सिर्फ भारत जैसे दुनिया के एक छोटे टुकडे मे कैद हो जाना वो कुए के मेढक बनना बराबर है । कुप मन्डुक बनना किसीके हीत मे नही । दुनिया के जिने के तरिके , उस की सोच सब प्रवाही जैसे है । प्रवाही को कही भी डालो वो अपनी सपाटी अपने आप ढुन्ढ लेता है । उसे मोडने की कोशिश से ज्यादा फरक नही पडता ।

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