RAJESH _ REPORTER

अब कलम से न लिखा जाएगा इस दौर का हाल अब तो हाथों में कोई तेज कटारी रखिये

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भारत माता की तश्वीर के बाद अब भारत में भारत माता की जय बोलने पर भी प्रतिबन्ध ?

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यह कैसा भारत है जहा मातृभूमि की जय कार भी लगाने पर रोक लगाई जाये .आज पूरा देश भ्रष्टाचार से पीड़ित होकर सडको पर उमड़ा पड़ा है जन सैलाब ऐसा की देखते बनता है लोगो का एक ही नारा भारत माता की जय ,वन्देमातरम ,भ्रष्टाचारी भारत छोड़ो लेकिन अब इस देश में भारत माता की जय बोलने पर भी प्रतिबन्ध लगने वाला है क्योकि भारत माता साम्प्रदायिक है ,वन्देमातरम बोलना गुनाह है ऐसा इस लिए लिख रहा हु क्योकि आज समाचार चेनल पर देखा की जामा मस्जिद के शाही इमाम अब्दुलाह बुखारी ने कहा की अन्ना के आन्दोलन से मुश्लिम समाज दुरी बनाये रखे क्योकि इस आन्दोलन में भारत माता की जय ,और वन्देमातरम के नारे लगाये जा रहे है जो की मुश्ल्मानो के लिए बोलना गुनाह है .आप को याद होगा जब अप्रैल के महीने में अन्ना जी का आन्दोलन हुआ था तो उनके मंच पर भारत माता का चित्र लगा हुआ था जिसके बाद बड़ा बबाल बचा था और इस बार मंच से भारत माता के चित्र को हटा कर उसके स्थान पर गाँधी जी का चित्र लगा दिया गया और मंच से रोजेदारो को इफ्तार तक करवाया जा रहा है जिससे किसी भारतीय को परहेज नहीं है लेकिन आज जब यह बात आई की भारत माता के नारे ना लगाये जाये तो
बड़ी चिंता हुई की जिस देश की खाते है जिस धरती और आश्मान पर शरण लेते है उसी धरती माता की जय कार करने में इन्हे क्यों परेशानी होती है अब सुनिए कुछ मुश्लिम युवाओ के विचार रिजवान अहमद ,अबुजर आलम facebook पर खबर सिमांचल ग्रुप में लिखते है की शाही इमाम का कथन बिलकुल सही है वही अबुजर आलम भी उनका समर्थन करते है और लिखते है की आजादी के बाद से ही भारत माता की जय बोलने वाले प्रधान मंत्री की कुर्शी पर बैठे तो फिर भ्रष्टाचार क्यों है ये तो है आज के मुश्लिम युवाओ के कथन जो की खुद को पढ़ा लिखा बताते है
और तो और आप को बता दू ये वही शाही इमाम है जिन्होंने पूर्व में भी यह बयान दिया था की वो पाकिस्तानी गुप्तचर संस्था (आई एस आई )के एजेंट है भारत सरकार में यदि ताकत है तो उन्हें गिरफ्तार करे और पुनह उन्होंने यह विवादस्पद बयान देकर भारत की तथाकथित एकता और अखंडता को चकनाचूर करने की कोसिस की है यहाँ तथाकथित इस लिए कह रहा हु की यदि एकता और अखंडता कायम होती तो पूरा मुश्लिम समुदाय आज अब्दुलाह बुखारी के बयान का विरोध करता लेकिन लोग समर्थन कर रहे है ..सही इमाम का ओहदा अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है लेकिन इन्होने आज तक इतने विवादस्पद बयान दिए है की अपनी गरिमा तक को भूल बैठे और उनके साथ खड़े हुए कुछ तथाकथित लोग भी यह भूल गए की वो भी इस देश के नागरिक है ना की पाकिस्तान के इन्हे यह सोचना चाहिए की भ्रस्ताचार को धार्मिक रंग ना दे अन्यथा भुगतना उन्हें भी पड़ेगा .क्योकि सभी इस बीमारी के शिकार है

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Santosh Kumar के द्वारा
August 22, 2011

श्री राकेश जी ,..वन्देमातरम ,भारतमाता की जय, के नारों के बिना यह आन्दोलन निर्जीव हो जायेगा ,..शाही इमाम तथा उनके गिने चुने समर्थकों के कथनों के आधार पर पूरे समाज पर सवाल उठाना सरासर नाइन्सफ़ी होगी ,.. वन्देमातरम


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