RAJESH _ REPORTER

अब कलम से न लिखा जाएगा इस दौर का हाल अब तो हाथों में कोई तेज कटारी रखिये

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गोली का जबाब गोली - नक्सल अर्थात तथाकथित डकैत ?

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कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमले के बाद एक बार पुन्ह देश की मीडिया और तथाकथित पढ़े लिखे जमातो में नक्सली समस्या से निपटने के लिए चिल पो आरम्भ हो चुकी है स्वामी अग्निवेश जैसे नक्सलियो के सरदार फिर से अवतरित हो चुके है मेधा पाटेकर और अरुंधती राय ,अरुणा राय सायद शर्म से सामने नहीं आ रही है इसके बाबजूद भी हमारे देश में ऐसे हजारो मानवाधिकार वादी है जिन्हें नक्सलियो में अभी भी सर्वहारा के लिए लड़ने वाली सेना नजर आती है और इन्हें सामंतो द्वारा शोषित मानते है सारकार में भी एक वर्ग है जो इनके खिलाफ सीधी लड़ाई छेड़ने की बात करता है वही दूसरा वर्ग बात चीत के जरिये समाधान चाहता है लेकिन साठ और सत्तर के मध्य से आरम्भ हुए इस आन्दोलन के इतिहाशिक पहुलो पर यदि हम गौर करे तो यह आन्दोलन अब आन्दोलन नहीं रहा राष्ट्रवादी संगठनो ने हमेसा से ही नक्सलियो के खिलाफ करवाई तेज करने की गुजारिश सरकार से की लेकिन सरकार ने वोट बैंक की राजनीती के कारन कभी भी इनके खिलाफ सीधी लड़ाई नहीं छेड़ी बस ताना बना ही बूना जिसका नतीजा हुआ की एक प्रदेश से आरम्भ हुआ यह आन्दोलन अब देश कई कई राज्यों तक पहुच गया है जिस लाल गलियारे की बात नक्सली करते है उस लाल गलियारे तक पहुचने में इन्हें अब अधिक समय नहीं लगने वाला क्योकि इनकी गति अब तेज हो चुकी है कभी इन्हें सिर्फ चीन का समर्थन प्राप्त था लेकिन अब इन्हें चीन के साथ साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश के चरम पन्थियो का भी समर्थन प्राप्त हो चूका है .फिर में कुछ लोग इन्हें भटका हुआ तो कुछ भ्रस्ताचार की वजह से नक्सली बनाना बताते है .पश्चिम बंगाल के नक्सल बाड़ी से आरम्भ (१९६७) हुआ यह आन्दोलन ४६ वर्षो का हो चूका है इन ४६ वर्षो में लगभग 50000 आम आदमी के साथ साथ सैनिक मारे गए यही नहीं कई राजनेता भी मारे जा चुके है और हम अब भी दुविधा में फसे हुए है की इनके खिलाफ सैनिक करवाई की जाये या नहीं जहा से यह आन्दोलन आरम्भ हुआ वह अब पूरी तरह शांति है और यह शांति बात चीत के जरिये नहीं मिली थी बरन कठोर करवाई के बाद ही हमें मिली थी .जीवन के अंतिम छनो में आन्दोलन के जन्म दाता कनु सान्याल भी वर्त्तमान नक्सलियो को डकैतों के संज्ञा दी और कहा की अब यह कोई नक्सली आन्दोलन नहीं है इनका मकसद सिर्फ लूट खसोट रह गया है . जिस प्रकार की हिंसा इनके द्वारा फैलाई जा रही है सी आर पी ऍफ़ के जवानो को मारा जा रहा है ऐसे में बात चीत के जरिये समाधान खोजना मुर्खता के सिवाय कुछ नहीं है .

naxalbaadi

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    jagojagobharat के द्वारा
    June 3, 2013

    शालिनी जी उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद


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