RAJESH _ REPORTER

अब कलम से न लिखा जाएगा इस दौर का हाल अब तो हाथों में कोई तेज कटारी रखिये

170 Posts

347 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2623 postid : 579962

14th अगस्त १९४७ ?

  • SocialTwist Tell-a-Friend

14th अगस्त १९४७ को सिर्फ दो मुल्को का बटवारा नहीं हुआ था यह बटवारा दो दिलो का भी था पाकिस्तान जहा खुद को एक मुश्लिम राष्ट्र घोषित कर चूका था वही हिंदुस्तान के नेताओ ने अपनी परम्परागत सहिष्णुता दिखाते हुए धर्मनिरपेक्षता की चादर ओढ़ कर हिन्दू और मुसलमानों को एक छत के निचे रखने की कोशिश की थी और नेहरु कबूतर उड़ा कर शांति का सन्देश देने में लगे थे ? x1km7bलेकिन इसका परिणाम आज भी देखने को मिल रहा है भले ही पाकिस्तान एक आजाद मुल्क है लेकिन आजादी के बाद भी पाकिस्तान के मन में हिंदुस्तान के प्रति द्वेष कम नहीं हुआ है आखिर ये द्वेष क्यों उत्पन हुआ ? जबकि जिन्नाह ने जो मांग भारत के समक्ष रखी थी उसे हमारे हुक्मरानों ने पूरी तरह मान लिया था ? बटवारा दो मुल्को का हो रहा था लेकिन लाशे दोनों और से बिछ रही थी जिन्ना ने नागरिको के मन में हिन्दुओ के प्रति ऐसी नफरत भरी थी की ट्रेन की बोगिओ में जिन्दा लोग कम और लाशे अधिक थी . imagesनफरत की ऐसी आंधी चलाई जिन्नाह ने की सब कुछ देखते देखते खाक हो गया .जिन्ना और नेहरु की लालच में लाखो नागरिक मारे गए और आज भी मारे जा रहे है जबकि जिन्ना ने कश्मीर हैदराबाद ,पंजाब को पाकिस्तान में मिलाने की पुरजोर कोशिश की थी लेकिन जिन्ना के झासे में ये रजवाड़े नहीं आये थे क्योकि इन्हें जिन्ना की नियत का पता चल गया था उसके वाबजूद १९४८ में पाकिस्तान ने हमला किया और उसे मुह की खानी पड़ी और ये सिलसिला अब तक चला आ रहा है चाहे १९६२ हो १९७१ हो या फिर कारगिल युद्ध लेकिन इन तमाम युधो में मुह की खाने के बाद भी पाकिस्तान नहीं सुधरा और आगे इसके सुधरने की उम्मीद भी नहीं है पाकिस्तान की लगाई आग में एक और जहा कश्मीर आज भी जल रहा है वही देश के अन्दर भी छद्म रूप से नफरत की आग फ़ैलाने की कोशिश पाकिस्तानी जेहादियो द्वारा की जा रही है और हिंदुस्तान के अन्दर भी आज एक तबका ऐसा मौजूद है जिसे पाकिस्तान से प्रेम है ? हमारे हुक्मरानों की वजह से यह संख्या दिन प्रति दिन बढती जा रही है जिसका नतीजा है देश में आये दिन होने वाले दंगे और बम विस्फोट क्योकि भले ही इन विस्फोटो के पीछे आई एस आई और अन्य आतंकी संगठनो के नाम सामने आते हो लेकिन आई एस आई या अन्य संगठन बिना भारतीय मदत के घटनाओ को अंजाम नहीं दे सकते ये कोई निरा बुद्धू भी बता देगा ? आये दिन देश को दहलाने की कोशिश आज भी जारी है चाहे कश्मीर हो या कन्या कुमारी कही भी आम आदमी स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है ? क्या एक पाकिस्तान हिंदुस्तान में अब भी बसता है यदि हां तो हमारे हुक्मरान कहा सोये हुए है ६६ वर्षो में भी इनकी नींद क्यों नहीं खुली ?

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

7 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Etta के द्वारा
October 17, 2016

Always reihfsreng to hear a rational answer.

संजय के द्वारा
August 20, 2013

उस दृश्‍य की कल्‍पना की जा सकती है जहां एक  ओर शवों से भरी ट्रेन देश में आ रही थी और दूसरी ओर हमारे शासक स्‍वतंत्र होने की खुशि‍यां मना रहे थे । जनता पस्‍त थी और नेता मस्‍त थे क्‍योंकि‍ उनकी मनचाही मुराद पूरी हो चुकी थी । हर व्‍यक्ति‍ की जीवन में ऐसे पल आते हैं जब भारी हृदय से कुछ ऐसा नि‍र्णय लेना पड़ता है जो कठोर और अप्रि‍य तो होता है पर भवि‍ष्‍य को ध्‍यान में रखकर लेना और उसका कार्यान्‍वयन करना अति‍ आवश्‍यक होता है । आधुनि‍क भारत के तथाकथि‍त नि‍र्माता महान बनने की आकांक्षा में ऐसे अप्रि‍य नि‍र्णय नहीं ले पाये (वि‍लायत में पढ़े नेता धर्म के नाम पर दंगे फसाद और लाखों लोगों के कत्‍लेआम देखने के बावजूद इतने अदूरदर्शी हो सकते थे यह मानने का कोई कारण समझ में नहीं आता) जि‍सकी कीमत आज यह देश चुका रहा है । जो परि‍स्‍थि‍ति‍यां अभी वि‍द्यमान हैं और सरकारें जि‍स तरह से शुतुरमुर्गी व्‍यवहार कर रही हैं उससे तो यही लगता है कि‍ यदि‍ अब भी हम जागृत न हुए तो भवि‍ष्‍य में ऐसा भी समय आ   सकता है कि‍ बेबस होकर शांति‍ के लि‍ये हमारी प्‍यारी मातृभूमि‍ का एक और वि‍भाजन करना पड़े ।

    jagojagobharat के द्वारा
    August 20, 2013

    सटीक और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार

Jaishree Verma के द्वारा
August 15, 2013

यह सत्य है की १९४७ में जो नफरत की आग हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच सुलगी थी वो आज तक जल रही है jagojagobharat जी ! उस समय की और आज की स्थिति को दर्शाता सार्थक लेख !

    jagojagobharat के द्वारा
    August 15, 2013

    उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत आभार जय श्री जी


topic of the week



latest from jagran