RAJESH _ REPORTER

अब कलम से न लिखा जाएगा इस दौर का हाल अब तो हाथों में कोई तेज कटारी रखिये

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ये है मेरा बिहार ?

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बिहार एक बार फिर से चर्चा में है चर्चा होनी भी चाहिए क्योकि समाजवाद के दो तथाकथित पुरोधाओं का मिलन होने वाला है ताकि राष्ट्रवाद को कमजोर कर सत्ता की मलाई चख सके .हलाकि इस मिलन की पठकथा लोकसभा चुनाव के बाद ही जब नितीश कुमार ने हार को स्वीकार कर जीतन राम मांझी को मुख्य मंत्री बनाया लिखी जा चुकी थी लेकिन सब के अपने अपने दावों की वजह से तारीखे बदलती गई और विलय का दिन आगे बढ़ता गया लेकिन विलय से पूर्व इन आठ महीनो के राजनितिक सरगर्मियॉ की चर्चा यहाँ आवश्यक है की कैसे एक बनते उभरते बिहार को जंगल राज -२ में परिवर्तित कर दिया गया सिर्फ और सिर्फ निजी महत्वाकांक्षा और स्वार्थ की खातिर ? सत्रह वर्षो के भाजपा जनता दल यूनाइटेड गठबंधन के दौरान जितनी भी उपलब्धिया बिहार ने बटोरी थी सब के सब स्वार्थ की बलिवेदी पर चढ़ा दिए गए वो भी समाजवाद और लोहिया वाद के नाम पर और जीतन राम मांझी को बिहार का मुख्य मंत्री बना कर कुर्शी पर बिठा दिया गया जो बिहार सकल घरेलु उत्पाद और अन्य क्षेत्रो में उच्य पद पर आसीन था वो देखते देखते धरासाई हो गया जिसका खामियाजा बिहार की जनता को उठाना पड़ रहा है स्वास्थ्य व्यवस्था पेय जल व्यवस्था हो या फिर कानून व्यवस्था सब के सब आज निचले पायदान पर खड़े है .नौ वर्षो के भाजपा जनता दाल यूनाइटेड की सरकार में जो विधि व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही थी और बिहारियों में गौरव का अहसाश जगा था वो समाप्त हो गया अब तो बिहार में एक बार फिर हत्या अपहरण लूट बलात्कार चरम पर है उसपर मुख्य मंत्री जी के बयानों की बात ही निराली अनर्गल बयान बाजी ने समाचार चनेलो को भले ही टी आर पी दी लेकिन सभ्य समाज इनके अनर्गल बयान बाजी से आजिज आ चूका है और इनके कुर्शी से उतरने की बाट जोह रहा है इन आठ महीनो में मुख्य मंत्री ने जो बयान बाजी की उसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को उठाना पड़ेगा क्योकि जिन नक्सलियों से हमारे सेना के जवान आये दिन लोहा लेते आ रहे है उसी को कभी भाई भतीजा तो कभी योद्धा बता कर मांझी के द्वारा महिमा मंडित किया जा रहा है और तो और मुख्य मंत्री ने अब दलित मुख्य मंत्री का कार्ड खेल कर पूर्व मुख्य मंत्री नितीश कुमार के रातो की नींद भी उड़ा दी है उसपर राजद जे डीयू विलय में भी अड़चन पैदा कर इनके समर्थको द्वारा की जा रही बयान बाजी और कुर्शी की लड़ाई से बिहार में सत्ता पक्ष ने विपक्ष को मजबूत हथियार दे दिया है जिसकी वजह से एक बार फिर बिहार में जंगल राज -२ की पुनरावृति से जनता त्राहिमाम कर रही है .

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
February 3, 2015

बिहार की बेहतरी इसी में है की यहाँ राजनीती बंद होनी चाहिए / यहाँ राजनीती एक समाजसेवा का माध्यम ना होकर रोजगार का माध्यम बन गया हैं / अच्छी लगी आपका यह लेख /

    jagojagobharat के द्वारा
    February 3, 2015

    राजेश जी बिलकुल सही कहा आपने राजनीती यहाँ सेवा नहीं रोजगार के लिए की जा रही है …बहुत बहुत धन्यवाद एक सार्थक प्रतिक्रिया देने हेतु

jlsingh के द्वारा
February 3, 2015

महत्वाकांक्षी होना एक बात है और अहंकारी होना बिलकुल ही अलग बात है. हार से हम सीख न लेकर मीन मेख ही निकालते रहते है, जितना जल्दी बिहारी नेता इस सच्चाई को समझ लेंगे बिहार बेहतरी की और बढ़ेगा. अन्यथा परिणाम हम सभी देख ही रहे हैं.

    jagojagobharat के द्वारा
    February 3, 2015

    सिंह साहब बहुत बहुत धन्यवाद एव आभार प्रतिक्रिया देने हेतु


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