RAJESH _ REPORTER

अब कलम से न लिखा जाएगा इस दौर का हाल अब तो हाथों में कोई तेज कटारी रखिये

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उम्मीदों का बजट

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संसद में आज वित्त मंत्री द्वारा बजट प्रस्तुत कर दिया गया जिसका इंतजार कई दिनों से था लेकिन भारत का आम बजट आम आदमी की उम्मीदों पर कितना खरा उतरा है यह जानना अत्यंत आवश्यक प्रतीत होता है पिछले दो दसको के बाद एक राष्ट्रवादी सरकार जो की किसानो युवाओ के साथ साथ माध्यम वर्ग की रहनुमाई के नाम पर यहाँ तक पहुंची उसने आखिर उस आम आदमी के लिए क्या किया जो आम आदमी महंगाई भरस्टाचार से जूझ रही थी उसका यह बजट कितना भला कर पायेगा इसका विश्लेषण जरुरी है . बजट में किसानो के लिए 5300 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के लिए
आवंटित
250000 करोड़ रुपये किसानों को नाबार्ड के गठित फंड के
जरिये मिलेंगे साथ ही मनरेगा के लिए 34600 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
वही 15000 करोड़ रुपये आरईबी योजना में लागू होगा।पीएम बीमा योजना के तहत हर नागरिक को बीमा
12 रुपये प्रीमियम पर हर साल दो लाख रुपये तक
का दुर्घटना बीमा का प्रावधान किया गया है साथ साथ
पीएम बीमा योजना शुरू करने का ऐलान के साथ साथ अटल पेंशन योजना शुरू की जाएगी, इसके तहत 60 साल के बाद
पेंशन मिलेगी। 1000 रुपये सरकार देगी और 1000 रुपये दावेदार देंगे जबकि
बीपीएल बुजुर्गों के लिए अलग से पीएम बीमा योजना।जन धन योजना में दो लाख रुपये का दुर्घटना बीमा मिलेगा।वही महिला सुरक्षा पर निर्भया फण्ड में एक हजार करोड़ दिए गए है जिससे जन धन योजना के तहत पेंशन जैसे प्रावधान करके गरीबी उन्मूलन के प्रति सरकार का नजरिया गंभीर प्रतीत होता है लेकिन जिस जी एस टी (GST ) की बात जोर शोर से लोकसभा चुनाव में की गई थी वो अब भी अधर में ही लटकी है / जहा तक महंगाई रोकने की बात है उसपर सरकार ने अपनी गंभीरता पूरी तरह नहीं दिखाई और सर्विस टैक्स को १२.३६% से बढ़ा कर १४% कर दिया गया जिससे रोजमर्रा की चीजो पर असर पड़ेगा और दाल रोटी महंगी हो जाएगी जिसपर सरकार को विचार करना चाहिए साथ ही जिस माध्यम वर्ग ने एड़ी छोटी एक कर सत्ता के सिखर तक पहुचाया उसके सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है इस आम बजट में यह खुसी की बात है की सरकार ने किसानो की सुधि ली है लेकिन माध्यम वर्ग की जबाब देहि भी सरकार की ही है उससे किनारा करना जायज नहीं ठहराया जा सकता इसलिए उम्मीदों के बजट ने माध्यम वर्ग के सपनो को उड़ान देने के बजाय धराशाई कर दिया है और सरकार को इस विषय पर गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए की आज माध्यम वर्ग जिसके परिवार में औषत ८ व्यक्ति है उसका क्या होगा जो की पहले ही रोजगार की कमी से जूझ रहा था अब महंगाई बढ़ने से हलाकि लोग कहेंगे १.६४% से क्या होने वाला है लेकिन तिनके तिनके जोड़ कर आशियाना खड़ा करने वालो के लिए ये ही काफी है ऊपर से कर में छूट की सीमा भी नहीं बढ़ाई गई तो कुल मिला कर कहा जा सकता है की यह बजट गरीबी उन्मूलन के प्रति तो गंभीर दिखती है लेकिन माध्यम वर्ग के प्रति सख्त रवैया अपना कर उन्हें गरीबो की श्रेणी में शामिल करने पर तुली हुई है .

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